शनिवार, मई 12, 2012

बादल



नीले आकाश के नीचे कुछ बादल अब बरसे हैं,
कच्चे घर की दीवारों पे कुछ रेले जा पसरे हैं.

सूरज जा अब चाँद उगा है, वो भी कुछ गीला-गीला है.
ताप रहा है आग भी लम्हा, वो भी कुछ सीला-सीला है.

- नीरज

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.