बुधवार, सितंबर 28, 2016

पोटली


आसमां की पोटली में 
जगमगाते टुकड़े तू 
समेट के लादता है कैसे?
हर टुकड़ा जो रात के सफ़र 
में भी हिलता नहीं?

-- नीरज

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