ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा



ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा?
उलझी हुई कई रातें तू यूँही सुलझा देती है.
उगते सपने कई तू हकीकत में ले आती है,
आसमान से तोड़ देती है सितारे अनगिनत ,
तोड़ के तू मेरी झोली में जड़ने चली आती है.

ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा?
प्यार की पवन से मेरी जुल्फें सहलाती है.
रात भर उंघती आँखों में नींद दे जाती है,
देखा नहीं तुझे तोड़ते गुलशन से फूल कोई,
काँटों के सेज को भी पल में फूल बना देती है .

तु ही रुलाती है कभी, तू ही हंसा देती है.
ए ज़िन्दगी मैं कैसे करूँ अदा शुक्रिया तेरा?

--नीरज

4 comments:

vandana 2/27/2010 06:29:00 PM  

bahut sunder rachna hai neerr ....:)

●๋• नीर ஐ 2/28/2010 11:14:00 AM  

Thanx vandu... :)

anjali 3/17/2010 12:58:00 PM  

hello.....

Anjali here...i read ur blog....kitna achha laga cant explain in words....wana b ur frnd?if u hv no problem

●๋• नीर ஐ 3/17/2010 09:45:00 PM  

Hi Anjali,

you can contact me further on neer91@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

पन्नों के बारे में

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से निकाल कर मैं यहाँ आप सभी के समक्ष रखता रहता हूँ.
कभी देश से जुड़े मुद्दे, कभी मुल्क के हालात, कभी प्रेम, कभी व्यंग भी नज़र आएगा आप को मेरे इन पन्नों में.
उम्मीद करता हूँ की आप को मेरे ये चंद पन्ने पसंद आयेंगे.
आपका कोई भी विचार हो, सुझाव हो या पन्नों में त्रुटी हो तो कृपया मुझे ज़रूर बताएं.
आने का और मेरे पन्नों को पढने का बहुत बहुत शुक्रिया.... :)