बातें वो अनकही सी



बहुत बार कही,
मगर कई बातें बेजुबां सी
लबो तक आने को लफ्ज़ ढूंढती रही .
बिलखते से जज्बात की तरह
जहन में कौंधती रहीं.

तुमने देखा नहीं शायद,
मेरी पलकों के साहिल पे
उन्हें खामोश बैठे हुए.
छूकर जो गुजरी यादो की बदली,
आँखों को समंदर करती रही.

बातें वो अनकही सी
तड़पती मोंज कि तरह.
पलकों को मेरी भिगाती रही.

--नीरज
Thanx to Vandana too who helped me with this creation. :)

13 comments:

sangeeta swarup 4/10/2010 12:09:00 PM  

खूबसूरत अभिव्यक्ति....

संजय भास्कर 4/10/2010 12:19:00 PM  

CHO KAR JO GUJRI YADO KI BADLI

DIL KO CHOO LENE PANKTIYA...

संजय भास्कर 4/10/2010 12:23:00 PM  

एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

स्वप्निल कुमार 'आतिश' 4/10/2010 01:31:00 PM  

neer aur vandna...dono ne mil kar bahut hi pyari nazm likhi hai ...bahut achhe mere bachhon ...:P

●๋• नीर ஐ 4/10/2010 02:06:00 PM  

@Sangeeta Masi - Shukriya... :)

●๋• नीर ஐ 4/10/2010 02:06:00 PM  

@Sanjay Ji - Bahut bahut shukriya... :)

●๋• नीर ஐ 4/10/2010 02:07:00 PM  

@Swapu - Thanx re.... :)

Udan Tashtari 4/10/2010 06:13:00 PM  

बढ़िया अभिव्यक्ति!!

vandana 4/11/2010 01:01:00 AM  

hmmm...walllaakammm :):

abhi jyada sunder lag rahi hai padhne me ..:)

●๋• नीर ஐ 4/11/2010 09:56:00 AM  

@Udan Tashtari Ji - Bahut bahut shukiya sir... :)

●๋• नीर ஐ 4/11/2010 09:57:00 AM  

@Vandana - Thanx for helping me... :)

pallavi trivedi 4/16/2010 12:40:00 PM  

good one....

●๋• नीर ஐ 4/16/2010 04:19:00 PM  

@Pallavi Ji - Bahut bahut shukriya.... :)

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