कुछ यादें तुम्हारा रास्ता पूछ रहीं हैं



गिरह में लिपटी हैं कुछ रात तुम्हारी,
कुछ कागज़ के पन्नों पे बिखरी हैं.
कुछ बारिश में भीग रहीं हैं,
कुछ मिटने का बहाना ढूंढ रहीं हैं.
आजाओ किसी रोज़ एक बार फिर तुम भी,
कुछ यादें तुम्हारा रास्ता पूछ रहीं हैं.

सूखे लबों से कंप-कंपाती याद तुम्हारी,
मयखाने से भी आज प्यासी लौटी है.
लहर-ए-हिज्र में तनहा डूब रही है,
महफ़िल में वो भी तनहा घूम रही है
आजाओ किसी रोज़ एक बार फिर तुम भी,
कुछ यादें तुम्हारा रास्ता पूछ रहीं हैं.

--नीरज

18 comments:

वाणी गीत 4/09/2010 10:31:00 AM  

महफ़िल में जो तनहा घूम रही हैं
वो यादें तेरा पता पूछ रही है ..
वाह ...!!

sangeeta swarup 4/09/2010 11:20:00 AM  

खूबसूरत अभिव्यक्ति.....रास्ता ज़रूर बता देना

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 12:20:00 PM  

@Vaani ji - Bahut bahut shukriya aane k liye aur sarahne k liye.... :)

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 12:21:00 PM  

@Sangeeta Mausi - Bahut bahut shukriya maasi ji..... :)

pallavi trivedi 4/09/2010 01:05:00 PM  

bahut sundar likha hai....first three lines mujhe bahut achchi lagi.

kunwarji's 4/09/2010 01:31:00 PM  

यादे रास्ता पूछ रही है तो बता क्यों नहीं देते ...?
बढ़िया रही जी आपकी ये कविता..

कुंवर जी,

संजय भास्कर 4/09/2010 02:08:00 PM  

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

jini 4/09/2010 02:56:00 PM  

hey nice 1 keep it up..

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 04:30:00 PM  

@Pallavi Ji - Sarahne k liye bahut bahut shukriya....Aate rahiye ga... :)

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 04:31:00 PM  

@Kunwarji - Bahut bahut dhanyavaad sarahne k liye. :)
Kuch raaste aise hote hain jo ki batlaaye nahin jaa sakte, un manzilon par bas badha jaa sakta hai.

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 04:32:00 PM  

@Sanjay Ji - Kriti safal hui jo aapke muh se waah nikal gaya padhte padhte. Kisi kriti k liye ye bahut acchi bat hoti hai ki pathak man prassan hua hai ke nahin. :)

Aate rahiye ga... :)

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 04:33:00 PM  

@ Jini - Thanx a lot... :)

vandana 4/09/2010 05:29:00 PM  

bahut khobsoorat najm hai neer :)

वन्दना 4/09/2010 06:02:00 PM  

खूबसूरत अभिव्यक्ति।

अनामिका की सदाये...... 4/09/2010 06:46:00 PM  

shayed 2nd time padha aapko...aap bahut acchha likhte hai...bahut pasand aayi aapki ye gehri se yado ke baadlo se bhari rachna. badhayi.

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 06:49:00 PM  

@Vandana - Thanx... :)

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 06:50:00 PM  

@Vandana Ji - Bahut bahut shukriya aane ka aur sarahne ka....Aate rahiyega... :)

●๋• नीर ஐ 4/09/2010 06:51:00 PM  

@Anamika Ji - Bahut bahut shukriya aapka.
Aap bhi bahut accha likhti hain. Aap shayad Shafaq pe bhi hain.

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