फासले



चाहतें हैं दरमियाँ, फिर भी दूरी न जाने क्यों है,
आहटें हैं दरमियाँ, फिर भी ख़ामोशी न जाने क्यों है?

आयतें लिखी हैं दिलों पे दोनों के एक ही,
भाषा खामोश ये दिल की न जाने क्यों है?

एक ही शहर में थामे खड़े हैं हाथ कबसे,
फिर भी मीलों की ये दूरी न जाने क्यों है?

सिमट आते हैं कभी रास्ते दरमियाँ अपने,
चाहत छिपाना तुझे लाज़मी न जाने क्यों है?

जुल्फों के ख़म मेरी नज़रों से सुलझाती है,
हथेली पे आइना फिर भी न जाने क्यों है?

--नीरज

ख़म = curls

10 comments:

निर्मला कपिला 6/21/2010 09:42:00 AM  

उमदा प्रस्तुति। शुभकामनायें

●๋• नीर ஐ 6/21/2010 09:56:00 AM  

Nirmala Ji - Bahut bahut dhanyavaad aane ke liye aur pasand karne ke liye. Aate rahiyega. :)

vandana 6/21/2010 10:42:00 AM  

behad khoobsooraat gajal hui hai ....oyee tum apne plog ki temp chage karke deho baht sunder sunder temps hai new vaali ..or easy bhi hain abhi pehle se :)

●๋• नीर ஐ 6/21/2010 10:56:00 AM  

Vandana - Thanx yaar. Us mein explore karne ko bahut kuch hai to saari setting dekhni padegi, thoda extra time milega to try karunga. :)

स्वप्निल कुमार 'आतिश' 6/21/2010 10:41:00 PM  

oye tune qafiya nibha liya be...mubarq hoi... :)oho copy p[et nahi ho raha...doosra wala sher khamoshi jitna hi mast hai ..

●๋• नीर ஐ 6/22/2010 08:39:00 AM  

Swapnil - Bada wala thanx re pushpaaaaaa..... :P :D

Avinash Chandra 8/05/2010 09:43:00 PM  

khubsurat, aur upar to mathematics correction ka certificate bhi mil gaya hai :)

Mousumi 4/02/2011 10:38:00 AM  

wah wah...wah wah... i knw this is for me... :D

●๋• नीर ஐ 4/02/2011 10:39:00 AM  

@Avi - Thanx... :)

●๋• नीर ஐ 4/02/2011 10:40:00 AM  

@Mousumi - Shukriya shukriya....yes it was written for u. :)

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