गुरुवार, अगस्त 05, 2010

लिबास



तू आएगी न जाने किस लिबास में
दामन में गिरेगी या मुझे ले उड़ेगी,
न दाएरे होंगे न बंदिशें कोई किसी की,
सुकून को मेरे दामन में सौंप जायेगी.
छुउंगा आसमां, हवा को काटूँगा मैं,
सूरज की किरणों से मुझे पावन करेगी.

तू किसी रोज़ यूँही चली आएगी या
रोज़ एक अहसास के साथ आएगी.
कभी फुर्सत मिले तो बताना मुझे,
मौत तू किस लिबास में आएगी.

--नीरज

4 टिप्‍पणियां:

  1. sujhav se pahle shikayat hai.......................
    yahin hain aur aaj pata chal raha hai ki inka blog bhi hai??
    Is it not sheer cheating???

    khair, shikayat baad me hogi....lemme read ur poems first.

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  2. सूक्ष्म पर बेहद प्रभावशाली कविता...सुंदर अभिव्यक्ति..प्रस्तुति के लिए आभार जी

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  3. @Avi - hehehe.....MUjhe nahin pata tha ki tumhe nahin pata ki mera blog hai. :)
    Thanx for coming.

    उत्तर देंहटाएं

आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.