लिबास



तू आएगी न जाने किस लिबास में
दामन में गिरेगी या मुझे ले उड़ेगी,
न दाएरे होंगे न बंदिशें कोई किसी की,
सुकून को मेरे दामन में सौंप जायेगी.
छुउंगा आसमां, हवा को काटूँगा मैं,
सूरज की किरणों से मुझे पावन करेगी.

तू किसी रोज़ यूँही चली आएगी या
रोज़ एक अहसास के साथ आएगी.
कभी फुर्सत मिले तो बताना मुझे,
मौत तू किस लिबास में आएगी.

--नीरज

4 comments:

Avinash Chandra 8/05/2010 09:40:00 PM  

sujhav se pahle shikayat hai.......................
yahin hain aur aaj pata chal raha hai ki inka blog bhi hai??
Is it not sheer cheating???

khair, shikayat baad me hogi....lemme read ur poems first.

संजय भास्कर 8/07/2010 07:02:00 AM  

सूक्ष्म पर बेहद प्रभावशाली कविता...सुंदर अभिव्यक्ति..प्रस्तुति के लिए आभार जी

●๋• नीर ஐ 8/07/2010 08:59:00 AM  

@Avi - hehehe.....MUjhe nahin pata tha ki tumhe nahin pata ki mera blog hai. :)
Thanx for coming.

●๋• नीर ஐ 8/07/2010 09:00:00 AM  

@Sanjay - Bahut bahut shukriya Sanjay ji. :)

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