सोमवार, मार्च 23, 2009

चुनाव की तयारी

शोर मच रहा है, शहर सज रहा है,
कहीं हाथ, कहीं भगवा सज रहा है।

फिर आये हैं मेरे दर पे वादों की पर्ची लेकर,
पर बैठा हूँ इस बार में पिछले वादों की पर्ची लेकर।
बतला देता हूँ, नए वादों पे वोट न डालूँगा तुमको इस बार,
पूरे हुए पिछले वादों पे आन्कूंगा तुमको इस बार।

५ मिनट को गड्ढा खोदने या झाडू लगाने से वोट न मिलेगा,
जनता का जिसने काम किया उस पर ही बस मुकुट सजेगा।
संसद में सोने वालों को जुलाब की गोली मिलेगी,
वहां काम करने वाले को फिर ताज पोशी मिलेगी।

बीत गए दिन अब वो जब वोट खरीदे जाते थे,
जाती, धर्म, के नाम पे लोग भड़काए जाते थे,
तुम भी जाग जाओ ए सफ़ेद पोश,
जनता जाग गयी है, बीत गए दिन जब तुम धुल झोंक के जाते थे।

अन्धकार छंट चुका है, पौ फट चुकी है,
इस बार कोई घोटाला न करना,
क्योंकि सुबह हो चुकी है...

-- नीरज

1 टिप्पणी:

  1. bhut badiya niraj ji ...ye aavaaj or jor se goonjni chayeeye hamare desh k neta uncha sunte hai .............
    so gayee thi javaniya ab gayee hai jaag ..lagta hai bharat tere ab badlege bhag

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