
छोटी सी एक प्यारी सी,
नन्ही सी राज दुलारी सी.
एक गुडिया घर में आई थी,
mou नाम से उसे बुलाई थी.
थोडी चुप-चुप, कुछ शरमाई सी,
भोली भाली, कुछ घबरायी सी.
मिठास शहद सी लायी थी,
mou नाम से उसे बुलाई थी.
अजय हुई तू एक पवन है,
निडर खड़ी तू एक गगन है,
ज़िंदगी में मौसुमी लायी है,
mou नाम से उसे बुलाई है.
--नीरज
Mou
Posted by
●๋• नीर ஐ
Thursday, August 20, 2009
Labels: My Poems




2 comments:
mein itni choti nahi thi....[:P] wo v aande ke andar...chiriya nahi hoon....[:-x]...hehe...
thnx neenu....
hahahahahaha.....Welcome Mou....Finally 5-6 mahine ke baad tera message aaya.... :D :D
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