आखरी जाम हो तो कुछ ऐसा हो....




हर एक सांस हर पल कम हो रही है,
ज़िन्दगी मैकदे में जाम बन रही है.

न कोई गम हो, न गिला, न शिकवा कोई
दोस्त हों आघोष में मेरे, न हो दुश्मन कोई
शिकन न हो चेहरे पे मेरे, न हो खौफ कोई
न शिकायत हो किसी से, न उधारी कोई
तमन्नाएँ अधूरी न रह जाएँ कोई
सिसकियाँ न हों मेरे जाने पे कोई
मोहब्बत के तमगे लगे हों कफ़न पे मेरे,
ज़िन्दगी का आखरी जाम हो तो कुछ ऐसा हो....

--नीरज

3 comments:

परमजीत बाली 8/19/2009 08:50:00 PM  

bahut badhiyaa!!

नीर 8/19/2009 11:42:00 PM  

Shukriya Paramjeet Ji... :)

vandana 8/20/2009 02:32:00 AM  

waaaaaah ... ye jindgi ke akhhiri jaam ki bahut khoobsoorat kamna ki ki hai ..bahut acchi ..

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