
हर एक सांस हर पल कम हो रही है,
ज़िन्दगी मैकदे में जाम बन रही है.
न कोई गम हो, न गिला, न शिकवा कोई
दोस्त हों आघोष में मेरे, न हो दुश्मन कोई
शिकन न हो चेहरे पे मेरे, न हो खौफ कोई
न शिकायत हो किसी से, न उधारी कोई
तमन्नाएँ अधूरी न रह जाएँ कोई
सिसकियाँ न हों मेरे जाने पे कोई
मोहब्बत के तमगे लगे हों कफ़न पे मेरे,
ज़िन्दगी का आखरी जाम हो तो कुछ ऐसा हो....
--नीरज
आखरी जाम हो तो कुछ ऐसा हो....
Posted by
●๋• नीर ஐ
Wednesday, August 19, 2009
Labels: My Poems




3 comments:
bahut badhiyaa!!
Shukriya Paramjeet Ji... :)
waaaaaah ... ye jindgi ke akhhiri jaam ki bahut khoobsoorat kamna ki ki hai ..bahut acchi ..
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