निशाँ उनके


वो चल दिए यूँ हम से हाथ छुड़ाकर,
दूर तक तकते रहे हम निशाँ उनके.
सोचा कभी मिलजायेंगे राह में इक रोज़,
दर-बदर ढूंढते रहे हम निशाँ उनके.

रात की वीरानिओं में खो गये जाने कहाँ,
चाँद भी पहचान न पाया निशाँ उनके.
नीर से गुजरी है वो कुछ इस कदर देखो,
वहां भी मिल न पाए निशाँ उनके.

--नीरज

10 comments:

vandana 3/28/2010 06:18:00 AM  

waahh ji waah kyaa baat kahi hai janab:) par yaar ye pic bilkul acchi nahi lag rahi seriusly majak nahi kar raheen hoon :)

Suman 3/28/2010 06:35:00 AM  

nice

●๋• नीर ஐ 3/28/2010 11:10:00 AM  

@Vandana - Thanx... :)

●๋• नीर ஐ 3/28/2010 11:10:00 AM  

@Suman - Shukriya.. :)

sangeeta swarup 3/28/2010 12:59:00 PM  

खूबसूरत नज़्म...

Udan Tashtari 3/28/2010 08:01:00 PM  

बहुत बढ़िया लगा.

●๋• नीर ஐ 3/30/2010 08:54:00 AM  

@Sangeeta Masi - Sneh k liye shukriya... :)

●๋• नीर ஐ 3/30/2010 08:55:00 AM  

@Sameer sir - Bahut bahut shukriya sir, aap ko nazm pe dekh kar accha lagta hai. Aate raha kariye... :)

Priya 4/10/2010 03:46:00 PM  

aaj bahut dino baad aana hua aapke blog par....kaafi rachnaaye padhi...samvednaao ko bayan bakhoobi karte hain aap

sach sikkon ke khatir zindgi bhaagti rahti hain

●๋• नीर ஐ 4/11/2010 09:59:00 AM  

@Priya Ji - Bahut bahut shukriya jo aapne mere blog ko apna samay diya. :)

Sahi mein har koi bhookh mitaane k peeche hi to bhaag raha hai.

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