गुरुवार, जून 04, 2009

मेरा खुदा

ज़िन्दगी के मेले में हम भी मोहबत सजाए बैठे हैं,
दीद में उनकी हम भी आस लगाए बैठे हैं.

ख्वाब की चादर पे कभी आना ए हमनफ़स,
मेरे चाँद में भी ठंडक है और दाग लगाए बैठे हैं.

तिजारत की इस दुनिया में मोल की कमी नहीं,
हम हर सांस तेरे आने की आस से सजाए बैठे हैं.

तेरी इस बस्ती में अब खुदाई कहाँ है,
हम तो तेरे नाम को सीने में छुपाए बैठे हैं.

इबादत में ये हाथ बस तेरे ही उठते हैं,
तेरे आने की राह में पलकें बिछाए बैठे हैं.

अहम् में बहने वाले यूँही बह जाया करते हैं "नीर",
हम तो इंसानियत को अपना खुदा बनाए बैठे हैं.

--नीर

5 टिप्‍पणियां:

  1. ''MERE CHAND ME BHI HAI THANDAK AUR DAAG LAGAYE BAITHE HAI''........ KYA KAHU .. BHAIYA... DIL ME UTAR GAYE AAP,,... AAPKA PROFILE DEKHA MAINE.......AUR MUJE BAHUT JYADA KHUSI HUI KI AAJ BHI LOG HINDUSTANI KEHLANA PASAND KARTE HAI.... AAP KAMAL K INSAAN HAI.......

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  2. waah bhaiya.......aap ka profle dekha aur dil ko bahut khusi mili... aaj bhi koi hindustani hai......MERA KHUDA k kis pankti ki tarif karu.... aap muje apna thoda aashirwwad de dijiye ... kripa kar k......aap jaise log aaj kal rarely milte hai...

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  3. Bahut bahut shukriya Ankit itni hausla afzaayi ke liye. Aap logon ka hi diya hausla hai jo kalam chalti rehti hai.
    Aate rehna. :)

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  4. wah wah wah neeraj its realy awesom ...........ek ek line kamaal hai
    अहम् में बहने वाले यूँही बह जाया करते हैं "नीर",
    हम तो इंसानियत को अपना खुदा बनाए बैठे हैं.
    bahut khoob neer ...

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  5. bahut khoobsoorat , bahut pyari gazal hain neer!
    तिजारत की इस दुनिया में मोल की कमी नहीं,
    हम हर सांस तेरे आने की आस से सजाए बैठे हैं.

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