मंगलवार, सितंबर 08, 2009

कन्या भ्रूण हत्या



माँ आज मैं 4 महीने की हो गयी,
बस 5 महीने और फिर मैं तेरी हो जाउंगी।

भैया के काँधे पे खेलूंगी,  पापा की ऊँगली पकडूंगी,
जब तू दफ्तर जायेगी, घर साफ़ मैं कर  लूँगी।
भैया की चिंता न  करना उसका खिलौना भी मैं बन लूँगी,
बस कुछ दिन और फिर मैं तेरी हो जाउंगी।
मन लगा कर पढूंगी, तेरा नाम रोशन करुँगी,
ये  पापा क्या बोले माँ? मैं कल तुझ से कट जाउंगी?
पापा का क्या है माँ, दर्द तो तुझ को, मुझ को सहना है,
मेरा क्या होगा माँ मैं तेरी कैसे हो पाउंगी?

हटवाना था जब मुझको तो देवी से क्यों माँगा था?
रो रो रात गुज़रीं तूने तब देवी ने मुझ को भेजा था।
हट कर ले माँ वरना मैं कल तुझ से कट जाउंगी।
अडिग हो जा माँ वरना मैं तेरी कैसे हो पाउंगी?

--नीरज

8 टिप्‍पणियां:

  1. great blog....

    हट कर ले माँ वरना मैं कल तुझ से कट जाउंगी।
    अडिग हो जा माँ वरना मैं तेरी कैसे हो पाउंगी?


    dil ko chuu gaee...

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  2. बहुत ही सुन्‍दर मन को छूते शब्‍द लाजवाब प्रस्‍तुति, बधाई

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  3. behad touching poem hai sir...
    shabd kam pad jayenge....

    bahut khub prastut kiya hai aapne us ladki ki soch ko
    HATS OFF

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  4. @ All

    Rachna ka dard samajhne aur usko sarahne ke liye bahut bahut dhanyavaad. :)

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  5. aapki is poetry ko pahle bhi padha hai community par shayad...par padhkar takleef hoti hai.....kuch na kar pane jaise bebasi....pata nahi ye sabkuch kabhi sahi hoga ya nahi ....par aapki kalam ne to bakhoobi kaam kiya hai

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  6. बेनामी9/18/2009 10:15:00 am

    A very nice thought conducted by the poem. Seriously it is poem of a real thought.

    Visu....

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  7. a very good thinking , we are proud of you.........

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  8. Sher - Bahut bahut shukriya aapke yahan aane ka aur krite ke bhaawon ko samajhne k liye. :)

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आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.