बुधवार, मई 26, 2010

मौन



मौन है क्यों मौन है
यहाँ सभा भरी क्यों मौन है,
क्या हुआ है यहाँ बताओ,
इस नीरस गढ़ का राज़ बताओ.
धुआं हुआ है बिन आग यहाँ क्या?
यहाँ सभा भरी क्यों मौन है?

रात बढ़ी है आहिस्ता से
यहाँ अन्ध्यारा क्यों चोर है,
क्या हुआ है यहाँ बताओ,
इस खामोशी का राज़ बताओ.
भूख पड़ी है भूखी भी अब
यहाँ सभा भरी क्यों मौन है?

--नीरज

15 टिप्‍पणियां:

  1. भूख पड़ी है भूखी भी.....बहुत खूब....बढ़िया अभिव्यक्ति

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  2. सब खुद से ही बोल रहे है,
    अन्दर ही अन्दर खुद को तोल रहे है,
    लगा अपनी आत्मा का मोल रहे है,
    अपमे मन को टटोल रहे है.....
    ऐसे में भला ओरो से बोले कौन....
    शायद इसलिए है मौन...

    कुंवर जी,

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  3. tukde tukde me baat achhi hai ye... sabha bhari ko ..bhari sabha kar le re pushpaaaaaa

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  4. भूख पड़ी हैं भूखी भी अब

    वाह क्या बात हैं
    बहुत अच्छा

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  5. @Kunwarji - Ho sakta hai ki jo aapne kaha wo hi wajah ho. Aane ka bahut bahut shukriya.... :)

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  6. @Swapnil - Thanx a tonne pushpaaaaa ki tu yahan aaya reeeeeeeeee........
    Sabha ko aisi hi rehne de flow mein padho to koi problem nahin hai. :P

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  7. bhookh paadhi hai bhookhi bhi ab ..bahut sunder neer ...

    par sabha bhari ko bhari sabha karke flow me koi fark aaya mujhe nahi lagta or ....last para me tumne bhari sabha kaha hai vo bilkul flow se bahar nahi hai ..

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  8. शानदार और सुन्दर पेशकश ...ऐसे लिखते रहे ..हमारी शुभकामनाये आपके साथ है

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  9. शंब्दों की इस सफ़र में आज से हम भी आपके साथ है

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  10. आपकी रचनाओं में एक अलग अंदाज है,

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आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.