बुत

ये दुनिया 
बड़ी नादान है, 
हर रंगीन 
बुत को 
भगवान 
समझ लेती है. 
हाथ बढ़ा दे 
गर कोई 
प्यार का.
रावन को भी
राम समझ
लेती है.

--नीरज 

7 comments:

sangeeta swarup 5/08/2010 11:13:00 AM  

उस वक्त तो राम ही नज़र आता है ना.... :):)

अच्छी अभिव्यक्ति

●๋• नीर ஐ 5/08/2010 12:14:00 PM  

@Maasi - haan ye to sach ahi par jab pata chalta hai ki ravan hai tab pachtava hota hai ki pehle dhyaan diya hota to ravan ko raam na samjha hota.

aane k liye shukriya.... :)

दिलीप 5/08/2010 12:32:00 PM  

waah bahut achcha...

nilesh mathur 5/08/2010 01:32:00 PM  

वाह! क्या बात है ! कमाल की पंक्तिया और भाव है !

●๋• नीर ஐ 5/08/2010 02:00:00 PM  

@Dilip Ji - Bahut bahut shukriya. aate rahiye. :)

●๋• नीर ஐ 5/08/2010 02:01:00 PM  

@Nilesh Ji - Dhanyavaad. aate rahiye. :)

संजय भास्कर 5/08/2010 02:30:00 PM  

... बेहद प्रभावशाली

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