ख़्वाबों की एक कश्ती है,
जो पलकों की वादी के पार
रोज़ चली आती है.
कभी सतरंगी ख्वाब लाती है
कभी बेरंगी ख्वाब सजा लाती है.
--नीरज
औरत होना..!
14 घंटे पहले
ख़्वाबों की एक कश्ती है,
जो पलकों की वादी के पार
रोज़ चली आती है.
कभी सतरंगी ख्वाब लाती है
कभी बेरंगी ख्वाब सजा लाती है.
--नीरज
Labels: Choti kavitayein
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5 comments:
waah lajawaab...
वाह! बहुत ही कम शब्दों में आप अपनी बात कह जाते हैं!
@Nilesh Ji - Bahut bahut dhanyavaad. aate rahiye... :)
@Dilip Ji - Shukriya. :)
BEAUTIFUL........
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