तन्हाई



ए कलम काश मेरा भी कोई तेरे
कागज़ की तरह हमदम होता,
मेरे दिल से उमड़ती स्याही को
मैं किसी से तो बाँट पाता.

ए आंसू काश मेरा भी कोई तेरे
गाल की तरह हमराज़ होता,
मेरे बिखरते मोतिओं को
यहाँ कोई तो समझ पाता.

ए धरती काश मेरा भी कोई तेरे
आसमां की तरह हमजाद होता,
मेरी आग सी तपती रूह को
कोई तो ठंडा कर पाता.

--नीरज

15 comments:

राजेन्द्र मीणा 5/26/2010 11:18:00 PM  

पहली बार आया था आपके ब्लॉग पर तब से ही लगा .......बहुत सराहनीय प्रयास ...अभी अच्छा लिखते हो ....लिखते रहोगे तो और अच्छा लिख पाओगे ,,,मेरा आशय यही है ..की बस अनवरत प्रयास करते रहिये ...अगर आप यूँ ही प्रयास करते रहे तो आपको खुद को महसूस होने लगेगा की आपकी लेखनी पहले से कई ज्यादा निखर रही है ...पर निरंतर चिंतन और लगन की आवश्यकता है ...लगन आप में है ....( आपकी रचना में दिखता है ) तो सोचने की क्षमता में अनायास ही प्रसार होगा ,,,,,रही बात टिप्पणियों की ....वो आये या ना आये ....आपको लेखन से सुकून अवश्य मिलेगा ....कुछ दिनों में टिप्पणिया बढ़ने लगेंगी ...अगर किसी की भी टिपण्णी देखे तो ८०% फिजूल होती है ....कई बार टिपण्णी केवल निमंत्रण ( अपने ब्लॉग पर ) के लिए दी जाती ..अगर आपको कोई सुझाव दे तो उस पर अमल करे .....एक दिन आपको मंजिल ..करीब नज़र आएगी ...अब जरूरत है सयंम की ....वो रहा तो ..समझो मंजिल मिल गयी .....और फिर हमारी शुभकामनाये हमेशा आपके साथ है ,,,,,,बस यही कहना है ..अगर किसी भी प्रकार की कोई ...समस्या हो तो हिन्दी ब्लॉग पर आपका एक भाई सदैव तैयार है ....निसंकोच कहे .....आपके सुखद भविष्य की उम्मीद के साथ

Jandunia 5/26/2010 11:31:00 PM  

बहुत खूबसूरत गजल

अर्चना तिवारी 5/26/2010 11:47:00 PM  

नीरज जी आपने बहुत सुंदर लिखा है ...कई जगह टाइपिंग में गलती लग रहीहै 'पाता' 'पता' हो गया है

दिलीप 5/27/2010 12:03:00 AM  

ahut khoob sir Rajendra ji ki baat par gaur kijiyega

अल्पना वर्मा 5/27/2010 01:46:00 AM  

बहुत भावपूर्ण लिखा है..अकेलेपन का दर्द बांटती कविता.

अल्पना वर्मा 5/27/2010 01:48:00 AM  

अकेलेपन का दर्द बांटती कविता.
खूब अभिव्यक्त किया है भावों को .

vandana 5/27/2010 06:05:00 AM  

Nice one ......

Udan Tashtari 5/27/2010 06:17:00 AM  

बहुत बढ़िया रचना!

संजय भास्कर 5/27/2010 09:03:00 AM  

काफी सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने अपनी कविताओ में सुन्दर अति सुन्दर.....

संजय भास्कर 5/27/2010 09:29:00 AM  

कविता के माध्यम से गहरी बात कही ...बहुत खूब

श्रद्धा जैन 5/28/2010 11:10:00 PM  

sabke saathi hai bas mujhe koi nahi mila .......bahut achche se abhivayakt kiya hai

●๋• नीर ஐ 5/31/2010 08:43:00 PM  

@All - Aap sabhi ka bahut bahut shukirya.... :)

ana 5/31/2010 08:55:00 PM  

bahut sundar rachana shabdon ke chayan bahut sundar

●๋• नीर ஐ 6/14/2010 08:22:00 AM  

@Ana Ji - Bahut accha laga jaan kar ki aap ko rachna pasand aayi. :)

Neelam 1/14/2011 12:41:00 PM  

Neeraj ji...Akelepan ka dard mehsus kiya humne..bahut achhi rachna..badhai.

एक टिप्पणी भेजें

आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

पन्नों के बारे में

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से निकाल कर मैं यहाँ आप सभी के समक्ष रखता रहता हूँ.
कभी देश से जुड़े मुद्दे, कभी मुल्क के हालात, कभी प्रेम, कभी व्यंग भी नज़र आएगा आप को मेरे इन पन्नों में.
उम्मीद करता हूँ की आप को मेरे ये चंद पन्ने पसंद आयेंगे.
आपका कोई भी विचार हो, सुझाव हो या पन्नों में त्रुटी हो तो कृपया मुझे ज़रूर बताएं.
आने का और मेरे पन्नों को पढने का बहुत बहुत शुक्रिया.... :)