बुधवार, जनवरी 06, 2010

त्रिवेणी 2




बोने से बबूल आम नहीं मिलते कभी,
खार से तो बस हाथ ही छिला करते हैं.

सुना है पडोसी देश आतंकवाद का शिकार है.



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घूमता है कुम्हार का चाक जब
कितना हुनर बिखेर देता है जग में.

ये बता ए वक़्त तेरा कुम्हार कहाँ बस्ता है?



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खिंच जाते हैं जब कुछ बाण तरकश से,
छूट ही जाते हैं वो धनुष से अक्सर,

शब्दों ने भी मेरे शिकार करना सीख ही लिया है.


--नीरज

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर त्रिवेणी हैं।बधाई।

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  2. jo baan khincte hai chutna tay haio unka.shabad bhi teer ban jate hai aksar.

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  3. @Paramjeet Ji

    Saraahne ke liye aur yahan tak aane ke liye Bahut bahut dhanyavaad.... :)

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  4. @Dimple Ji

    Sahi kaha aapne wo teer ban jaate hain aur log jaane ya anjaane mein shikaar ho jaate hain.

    Aane ke liye shukriya....aate rahiye ga.... :)

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  5. नीर जी बस आपके शब्द यूँ ही शिकार करते रहे ......बहुत खूब .....!!

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  6. ohhhh waaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaawwwwww....kehhna mushkil hai kon si jyada acchi hai...teeno hi best haii .....pic to gajab hai ....pic k saath padhne me jyada maja aata hai :)....

    oye tumne shabdo se teer chalana abhi seekha hai ....main to tumhe shikaar master samajhti thi :P hhehehehehe

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  7. @Harkirat Ji -

    Bahut shukriya Trivenion ko samajhne ke liye....aate rahiye ga.... :)

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  8. बहुत खूब......तरकश वाली बहुत सुन्दर है.....बधाई

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  9. Bahut bahut shukriya Sangeeta maasi...
    Aap ko apne blog pe dekh kar acha laga.... :)

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आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.