त्रिवेणी

चांदनी है जब तक ज़मीन पर कोई चाँद को देखता तक नहीं,
जो आजाती है अमावस बीच में, चाँद की कमी खलने लगती है.

रिश्तों ने भी आज कल कुछ यूँही घटना बढ़ना सीख लिया है.

*************************************

रवि इत्मिनान से आता है आज कल,
चाँद 14 घंटे मशक्कत करता है.

गरीब के ठिठुरने के दिन आ गए हैं.

--नीरज

11 comments:

अनिल कान्त : 1/04/2010 10:22:00 PM  

क्या खूब लिखे हो भाई

शबनम खान 1/04/2010 10:29:00 PM  

नीर जी आपकी ये रचना तो मेरी समझ से परे है...।
शेर बहुत अच्छा है..इसे ठंड से क्यूँ जोङ दिया जनाब....

●๋• नीर ஐ 1/04/2010 10:33:00 PM  

शुक्रिया अनिल जी.... :)

●๋• नीर ஐ 1/04/2010 10:42:00 PM  

@शबनम
त्रिवेणी वो होती है जिस में की आप दो चीज़ों की बात करें और तीसरी भी मिल जाए तीसरे मिसरे में. जैसे की गंगा, जमुना में मिलती हुई सरस्वती.

सूरज यानी की रवि ठण्ड में कम समय के लिए निकलता है और ज्यादा तर अँधेरा सा ही रहता है, आप और हम तो घर में रजाई या heater लेकर बैठे रहते हैं पर ठण्ड का कहर तो गरीब को झेलना पड़ता है.

परमजीत बाली 1/05/2010 01:20:00 AM  

बहुत बढ़िया!!!

Udan Tashtari 1/05/2010 07:10:00 AM  

बहुत उम्दा त्रिवेणियाँ...


’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

-त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

-सादर,
समीर लाल ’समीर’

●๋• नीर ஐ 1/05/2010 11:00:00 AM  

@ परमजीत जी - शुक्रिया.... :)

●๋• नीर ஐ 1/05/2010 11:00:00 AM  

@समीर जी - शुक्रिया... :)

sangeeta swarup 1/10/2010 11:09:00 AM  

बहुत खूबसूरत त्रिवेणियाँ हैं ....बहुत खूब

●๋• नीर ஐ 1/10/2010 09:10:00 PM  

Shukriya maasi... :)

sharad pawar 9/28/2010 11:00:00 PM  

त्रिवेणी अब कुछ बयाँ करती है .............चंद टूटे शिशो के दर्द को ....और बांध लगा लेती है बहते रक्त पलाश को ......भीगा है जिसमे एक उलज़ा हुआ धर्म

एक टिप्पणी भेजें

आपके विचार एवं सुझाव मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं तो कृपया अपने विचार एवं सुझाव अवश दें. अपना कीमती समय निकाल कर मेरी कृति पढने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

पन्नों के बारे में

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से निकाल कर मैं यहाँ आप सभी के समक्ष रखता रहता हूँ.
कभी देश से जुड़े मुद्दे, कभी मुल्क के हालात, कभी प्रेम, कभी व्यंग भी नज़र आएगा आप को मेरे इन पन्नों में.
उम्मीद करता हूँ की आप को मेरे ये चंद पन्ने पसंद आयेंगे.
आपका कोई भी विचार हो, सुझाव हो या पन्नों में त्रुटी हो तो कृपया मुझे ज़रूर बताएं.
आने का और मेरे पन्नों को पढने का बहुत बहुत शुक्रिया.... :)