पल





इक अकेली शाम से कुछ पल तेरे,
अपने लिए चुन लिए थे मैंने,
उस आधे घंटे की मुलाकात में
कई ख्वाब बुन लिए थे मैंने.

कजरारी आखों से तेरी कुछ
सुनहरे पल समेट लिए थे मैंने.
थर-थराते गुलाबी लबों से तेरे,
बिखरते लफ्ज़ चुन लिए थे मैंने.

गालों पे फैलती-सिमटती लाली को,
सहेज के दिल के पन्नों में रख लिए थे मैंने.
तेरे जुल्फों को संभालते पलों को,
इस शाम की माला में पिरो लिए थे मैंने.

इस शाम के गुज़रे पलों को मैंने,
सहेज कर, शाम की माला में पिरो के
याद की मेज़ पर रख लिया है.
न जाने ये शाम कभी लौटे न लौटे.......

--नीरज

14 comments:

sangeeta swarup 1/12/2010 10:27:00 PM  

bahut khoobsurati se sahaeji hain yaaden....badhai

संजय भास्कर 1/12/2010 11:10:00 PM  

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Udan Tashtari 1/12/2010 11:12:00 PM  

बहुत भावपूर्ण...उम्दा रचना!!

vandana 1/13/2010 08:30:00 AM  

aweeeeeeeeeesssssom !!! bahut sunder najm hui hai.....:)

●๋• नीर ஐ 1/13/2010 08:40:00 AM  

@Maasi Ji -

Shukriya.... :)

●๋• नीर ஐ 1/13/2010 08:40:00 AM  

@Sanjay Ji -

Bahut bahut dhanyavaad sarahne ke liye aur aane ke liye.... :)
Aate rahiye ga... :)

●๋• नीर ஐ 1/13/2010 08:41:00 AM  

@Udan Tashtari -

Shukriya sir.... :)

●๋• नीर ஐ 1/13/2010 08:41:00 AM  

@Vandana -

Thanx re.... :)

dimple 1/13/2010 06:45:00 PM  

kabhi kabhi choti si mulakaat kavita ban jati hai

●๋• नीर ஐ 1/13/2010 06:57:00 PM  

@Dimple Ji -

Aur kavita zindagi...

Aane ke liye shukiriya... :)

दिगम्बर नासवा 1/14/2010 01:44:00 PM  

कुछ ऐसे हसीन लम्हे सॅंजो कर रखने के लिए होते हैं ..........

●๋• नीर ஐ 1/14/2010 04:54:00 PM  

@Digambar Ji -

Aane aur saraahne ke liye bahut bahut dhanyavaad.... Aate rahiye ga.... :)

श्रद्धा जैन 1/17/2010 08:48:00 PM  

कितना बेबस होगा वो हर पल जब कोई अपने पुरे परिवार को अपने लिए हर पल मरते देखता हो
और मरने से मिली आज़ादी ..............
निशब्द हूँ क्या कहूँ
आपकी लेखनी दिल को गहरे तक झकझोरती चली गई

jini 3/27/2010 01:03:00 PM  

very nice love it..

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