याद





वो मंज़र कभी याद आते हैं ,
कभी आँखों से बरस जाते हैं.

रह जाते हैं ठहर कर गालों पर,
मुस्कान बन बिखर जाते हैं.

दिन भर रहते हैं संग मेरे,
रात में तारे बन जगमगा जाते हैं.

चुभते हैं दिन भर दिल में मेरे,
रात होते ही महेक जाते हैं.

उठते हैं अंगार बनके ज़हन में,
राख बनके बिखर जाते हैं .

--नीरज



10 comments:

sangeeta swarup 1/10/2010 11:05:00 PM  

खूबसूरती से लिखे हैं एहसास .....

यादों को हमेशा जगमगा कर रक्खो
अंगार बने भी तो उन्हें जला कर रखो....

Mithilesh dubey 1/10/2010 11:20:00 PM  

बहुत ही बढिया अभिव्यक्ति । बधाई

vandana 1/11/2010 12:35:00 AM  

bahuuuuuuuuuuuuuuut khooob neeer ...last lin to behad khoobsoorat kahi hai ...:)

शबनम खान 1/11/2010 01:03:00 AM  

यादें तो वो दौलत है जिसके बिना ज़िन्दगी वीरान है...
बहुत अच्छा पिरोया यादो को..

Udan Tashtari 1/11/2010 05:16:00 AM  

बहुत बढ़िया, नीरज..अच्छी गज़ल.

●๋• नीर ஐ 1/11/2010 09:35:00 AM  

@Sangeeta Ji
Bahut bahut shukriya maasi Ji... :)

Angaaron ko ab tak jala kar rakha hai,
Jalne ke dar se chupa ke rakha hai.

●๋• नीर ஐ 1/11/2010 09:35:00 AM  

@Mithilesh Ji -

Sarahne ke liye shukriya....aate rahiye ga.... :)

●๋• नीर ஐ 1/11/2010 09:36:00 AM  

@Vandana -

Thanx a lot... :)

●๋• नीर ஐ 1/11/2010 09:37:00 AM  

@Shabnam Ji -

Yaadon ki daulat ko samajhne ke liye shukriya.... :)

●๋• नीर ஐ 1/11/2010 09:38:00 AM  

@Udan Tashtari Ji -

Bahut bahut shukriya sir... Keep coming... :)

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