मंगलवार, मई 19, 2009

अनमने भाव

अनमने भाव इस दिल में आज कल आने लगे हैं,
दिल को हर घडी झिंझोर ने, डराने लगे हैं.

बस दिए में दिल लगता है, न जाने क्या है मेल मेरा,
ज़िन्दगी धुआं हो रही है, वक़्त दिखता तेल मेरा.

सैमल सा हल्का फुल्का कभी इधर कभी उधर,
विचरण करता ह्रदय मेरा कभी इधर कभी उधर.

कंकर दिखता पहाड़ मुझे, कण टीला सा दिखता है,
दूजा खुश ज्यादा मुझसे, हास्य करीला सा दिखता है.

अश्रु साथ नहीं देते अब दिल तनहा ही रोता है,
साया रूठ गया है अब मन तनहा ही सोता है.

--नीरज

*करीला - जिस पर की गाँव में मटके को फोड़ कर, नीचे के गोलाई वाले भाग को चूल्हे पे औंधा रख कर रोटियां सेकी जाती हैं. सीधी आंच लगने के कारण वो समय के साथ काला भी हो जाता है.

2 टिप्‍पणियां:

  1. बस दिए में दिल लगता है, न जाने क्या है मेल मेरा,
    ज़िन्दगी धुआं हो रही है, वक़्त दिखता तेल मेरा.
    bahut hi gehri panktiya hai neeraj ji
    अनमने भाव इस दिल में आज कल आने लगे हैं,
    दिल को हर घडी झिंझोर ने, डराने लगे हैं.
    "हमारी इस बेखयाली पर अब, इल्जाम लगने लगे है
    लोग हमसे कुछ अनकहे से सवाल करने लगे है
    कोई परख न ले, इन आँखों के मंजर
    हम पलके उठाने से भी डरने लगे है "
    khuch pankti jodne ki gusthaki kar hi hai maaf kariyega ....

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  2. Arre nahin nahin maafi kaisi....kaafi accha likha hai aapne.
    Nazm samajhne ke liye shukriya. :)

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